
संवाददाता
कानपुर। ऑफिस का काम हो या फिर मनोरंजन, मोबाइल, लैपटॉप और टीवी अब जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन लगातार घंटों स्क्रीन पर नजरें जमाए रखना आंखों के लिए खतरे की घंटी बनता जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, इससे ‘कंप्यूटर विजन सिंड्रोम’ नाम की बीमारी तेजी से बढ़ रही है, जो आंखों की सेहत पर सीधा असर डालती है।
लंबे समय तक कंप्यूटर, टैबलेट या स्मार्टफोन की स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इसी स्थिति को कंप्यूटर विजन सिंड्रोम या डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है।
एलएलआर अस्पताल की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन के अनुसार, सामान्य व्यक्ति एक मिनट में 15 से 20 बार पलकें झपकाता है, लेकिन स्क्रीन देखते समय यह संख्या घटकर 5 से 7 बार रह जाती है। इससे आंखों में सूखापन और थकान शुरू हो जाती है।
अगर आंखों में जलन या खुजली रहती है, लालिमा और पानी आता है, धुंधला दिखाई देता है या फिर सिरदर्द के साथ गर्दन और कंधों में दर्द बना रहता है, तो यह कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का संकेत हो सकता है। कई लोगों को आंखों में भारीपन भी महसूस होता है।
डॉक्टरों का कहना है कि स्क्रीन से पूरी तरह दूरी संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतें बदलकर आंखों को सुरक्षित रखा जा सकता है। हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर देखें। काम के दौरान जानबूझकर बार-बार पलकें झपकाएं, इससे आंखों में नमी बनी रहती है। स्क्रीन आंखों से 20-25 इंच दूर रखें और ब्राइटनेस कमरे की रोशनी के अनुसार सेट करें। दिनभर स्क्रीन पर काम करने वालों के लिए ब्लू कट या एंटी-ग्लेयर चश्मा फायदेमंद है। भरपूर पानी पिएं और विटामिन-ए युक्त खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें।
डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि अगर आंखों में लगातार दर्द या धुंधलापन बना रहता है, तो खुद से आई-ड्रॉप डालने की गलती न करें। तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं।
उन्होंने बताया कि कानपुर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना इस तरह के करीब 20 मरीज पहुंच रहे हैं, जो चिंता का विषय है। डॉक्टरों का मानना है कि देशभर में यह समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है और समय रहते जागरूकता बेहद जरूरी है।






