
संवाददाता
कानपुर। मेट्रो डिपो में स्थापित एक मेगावाट का सोलर प्लांट पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक बचत दोनों में सहायक साबित हो रहा है। अगस्त 2023 में गुरुदेव चौराहा स्थित कानपुर मेट्रो डिपो में यह प्लांट स्थापित किया गया था।
प्लांट की वार्षिक बिजली उत्पादन क्षमता 10.80 लाख यूनिट है। इससे मेट्रो को सालाना एक करोड़ रुपए की बचत हो रही है। मेट्रो डिपो के ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर की छत पर 10,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में यह प्लांट स्थापित है। इसमें करीब 3000 सोलर पैनल लगाए गए हैं।
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की यह पहल पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। सोलर प्लांट से प्रतिवर्ष 770 मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है। यह कमी 8900 पेड़ लगाने के बराबर है।
कानपुर मेट्रो एलिवेटेड स्टेशनों की छतों पर ट्रांसलुसेंट शीट का प्रयोग भी करती है। इससे दिन के समय बिजली की अतिरिक्त बचत होती है। गौरतलब है कि 20 अगस्त को अक्षय ऊर्जा दिवस मनाया जाता है।
सोलर प्लान्ट से जितनी भी बिजली का उत्पादन होता है, उसे स्थापित सिस्टम में वापस फ़ीड कर दिया जाता है। ऐसे में, नियमित तौर पर आने वाले बिल में कुल इस्तेमाल की गई बिजली यूनिट से, मेट्रो सिस्टम द्वारा वापस फ़ीड की गई बिजली यूनिट को घटाकर, कानपुर मेट्रो को शेष यूनिट के लिए बिजली बिल का भुगतान करना होता है। और इस तरह से ऊर्जा एवं आर्थिक व्यय दोनों ही चीजों की बचत होती है।
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने बताया कि अन्य सार्वजनिक परिवहन के साधनों की तुलना में मेट्रो पर्यावरण की सबसे अच्छी मित्र है क्योंकि मेट्रो प्रणाली जीरो कार्बन एमिशन के साथ संचालित होती है। यूपीएमआरसी ने परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और उनकी स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा के अलावा ट्रेन और लिफ्ट में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, कार्बन डाईऑक्साइड सेंसर आधारित एच.व्ही.ए.सी. नियंत्रण प्रणाली, एलईडी लाइटिंग का प्रयोग आदि कई उपाय किए हैं।






