
संवाददाता
कानपुर। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के चलते देश ही नहीं शहर में भी रसोई गैस की किल्लत बढ़ गई है,जिसका असर अब आम लोगों की थाली तक साफ दिखाई देने लगा है। गैस की कमी के चलते शहर की नामचीन खानपान और मिठाई की दुकानों ने भी अपने व्यंजन सूची में बड़ा बदलाव किया है। ग्राहकों को उनके लोकप्रिय व्यंजनो के स्वाद चखने के लिए भी नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे खाने-पीने के शौकीनों को नामचीन दुकानों से मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि कई दुकानदार अब गैस के बजाय कोयला भट्टी और डीजल भट्ठी के सहारे काम चला रहे हैं। हालांकि इन विकल्पों के जरिए व्यंजनों की मात्रा पूरी नहीँ हो पा रही है और न ही सभी पकवान तैयार किए जा पा रहे हैं। यही वजह है कि दुकानों ने अपनी व्यंजन सूची को सीमित कर दिया है।
शहर के प्रमुख बाजारों में स्थित समोसे की दुकानों पर पहले जहां पनीर, चीज और विभिन्न वैरायटी के समोसे मिलते थे, अब वहां केवल सीमित विकल्प ही उपलब्ध हैं। दुकानदारों ने गैस संकट के चलते चीज और पनीर से बने समोसे, साथ ही खस्ता जैसे आइटम बनाना बंद कर दिया है। इसी तरह शहर की पुरानी मिठाई दुकानों पर भी असर साफ नजर आ रहा है। रबड़ी, इमरती और मलाई जैसे लोकप्रिय मिठाई आइटम फिलहाल व्यंजन सूची से गायब हैं।
दुकानदारों का कहना है कि पिछले करीब 15 दिनों से गैस संकट के कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, इसके अलावा डीजल भट्ठी के उपकरण और बॉयलर भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे परेशानी और बढ़ गई है।
यहां तक कि कुछ समय के लिए दुकानें भी बंद भी रखनी पड़ रही है।
इन परिस्थितियों में सभी मिठाइयों को उसी मात्रा के साथ बनाना संभव नहीं है।
गैस के संकट का असर कीमतों पर भी पड़ा है। कई दुकानदारों ने लागत बढ़ने के कारण देशी घी से बनी मिठाइयों के दाम में इजाफा कर दिया है। उनका कहना है कि ईंधन महंगा पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है और इसका असर सीधे दुकानदारों के साथ ग्राहकों पर भी पड़ रहा है। माना जा रहा है कि गैस सिलेंडर के संकट ने शहर के खानपान व्यवसाय को बुरी तरह प्रभावित किया है। जब तक गैस आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक लोगों को अपने पसंदीदा व्यंजनों के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।






