
संवाददाता
कानपुर। शारदीय नवरात्रों के पांचवे दिन भक्तों ने मां कूष्माण्डा की उपासना दूसरे दिन भी की। इस बार के नवरात्रों में ये तिथि दो दिनों की मानी गयी है। जिसमें दोनों दिनों में माता कूष्माण्डा से शांति और कल्याण की कामना की गई।
देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पडी। जयकारे लगाते काफी संख्या में भक्त मंदिरों की ओर गए। घरों में भी पूजा अर्चना का सिलसिला पूरी तरह से जारी रहा, जहां भक्तों ने माता से उन्नति का वरदान मांगा।
शहर के तपेश्वरी, बाराहदेवी, चंद्रिकादेवी, बंगाली मोहाल स्थित कालीदेवी, काली मठिया, जंगली देवी मन्दिरों समेत शहर के प्रमुख मंदिरों में बच्चों के मुंडन और कर्णछेदन संस्कार की धूम मची रही।
बिरहाना रोड स्थित तपेश्वरी मंदिर में बच्चों के मुडन संस्का्र के लिए तमाम भीड उमडी, 6 महीने से लेकर 8 साल के बच्चों तक के मुंडन और कर्ण छेदन संस्कार किए गए। इसके बाद मिष्ठान वितरण भी किया गया।
माना जाता है कि सीता माता ने अपने बच्चों लव और कुश का मुंडन भी इसी दरबार में करवाया था जिसके बाद से परम्परा शुरु हो गयी थी जो आज भी कायम है और इस मंदिर में मुंडन संस्कार कराने की परंपरा जीवन्त है। कई बुजुर्ग महिलाएं बच्चों का मुंडन या कर्ण छेदन होने के दौरान मंगल गीत गुनगुनाती रही। मुंडन के दौरान बधाई गीत गाने वाली महिलाएं भी परिजनों से खूब न्यौछावर लेती रही।
हटिया स्थित बुद्धादेवी, डिप्टीपड़ाव स्थित चंद्रिका देवी, किदवईनगर स्थित जंगलीदेवी, दबौली, गोविंदनगर स्थित दुर्गा मंदिर में देर रात तक भक्तों ने मां कूष्माण्डा की पूजा अर्चना की।
गंगापुल पार कर शुक्लागंज स्थित दुर्गा मंदिर में भी शहर के काफी संख्या में माता के भक्त पहुंचे और माता से आशीर्वाद मांगा।






