• मां ने अकेले किया जुड़वा बेटियों का अंतिम संस्कार।

संवाददाता
कानपुर । अपनी 11 साल की जुड़वां बेटियों की गर्दन रेतकर नृशंस हत्या करने वाला पिता सलाखों के पीछे है। एक साथ जन्मी रिद्धी-सिद्धी दुनिया से भी साथ ही अलविदा हुईं।
मां ने हिंदू कब्रिस्तान में दोनों बेटियों को दफन किया। इस दौरान वो दो बार गश खाकर गिर पड़ी। माँ बेटियों के शव से लिपटकर रोती रही, वहां उसे संभालने वाला भी कोई नहीं था। महिला पुलिसकर्मियों ने उसे किसी तरह संभाला। वहीं, आरोपी के परिवार से पुलिस ने जब फोन किया तो आरोपी के पिता बोले- बेटे ने लवमैरिज की थी, उससे कोई लेना-देना नहीं है।
कानपुर के किदवई नगर में रविवार तड़के 45 साल के शशि रंजन मिश्रा ने अपनी 11 साल की जुड़वां बेटियों की गला रेतकर हत्या कर दी थी ।
आरोपी शशि रंजन मिश्रा ने बताया था कि मैं बेटियों को बहुत प्यार करता था। मुझे लगता था कि मेरे मरने के बाद बेटियों का क्या होगा? वो कैसे सर्वाइव करेंगी? इसी बात को लेकर मैं परेशान था। 18 अप्रैल को मैंने बेटियों की हत्या करके खुद सुसाइड करने का प्लान बनाया। मैंने उनके खाने में नींद की गोलियां मिला दीं। जब दोनों अचेत हो गईं तो गला घोंटा, फिर चापड़ से गर्दन रेत दी। लेकिन खुद सुसाइड करने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
नौबस्ता थाने के विराट नगर चौकी इंचार्ज सुशील कुमार ने बताया कि शशिरंजन मूलरूप से बिहार के गया का रहने वाला है, जबकि उसकी पत्नी रेशमा पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी की रहने वाली है। दोनों किराए के फ्लैट में रहते थे। दोनों ने 2014 में लव मैरिज की थी।
चौकी इंचार्ज ने बताया कि हत्याकांड के बाद से शशिरंजन के परिवार को कॉल पर जानकारी दी गई, लेकिन शशिरंजन के पिता शेखर मिश्रा, भाई राजीव मिश्रा और बहन स्वीटी ने साफ तौर पर आने से इनकार कर दिया। परिवारवाले बोले कि शशिरंजन ने अपनी मर्जी से परिवार वालों के खिलाफ जाकर लव मैरिज की थी, उनके किसी भी मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि कोई भी परिवार का सदस्य कानपुर नहीं आएगा। पुलिस ने दोबारा कॉल की तो परिवार के लोगों ने बगैर कोई बात किए कॉल कट कर दिया। रेशमा ने रोते-बिलखते मामले की जानकारी दी तो उसे भी फटकार लगाते हुए कॉल काट दिया।
इधर, रेशमा ने अपने मायके पश्चिम बंगाल कॉल की तो उसके मां और भाई कानपुर के लिए रवाना हुए।
इस दौरान शशिरंजन की बुआ पूनम वाराणसी से बेटी स्वाष्तिका के साथ पहुंच चुकी थीं, लेकिन शशिरंजन ने दोनों को पहचानने से इनकार कर दिया। इस पर पत्नी रेशमा ने कहा कि वह उन्हें पहचानती है, वे शशि की वाराणसी में रहने वाली बुआ और उनकी बेटी हैं।
इसके बाद पुलिस ने दोनों को रेशमा से मिलने दिया और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हिंदू कब्रिस्तान में दाखिल होने दिया। पुलिस वालों ने रेशमा को अंतिम संस्कार के बाद सहारा देते हुए गाड़ी में बैठाया और घर पहुंचाया।
अंतिम संस्कार के बाद बुआ और उनकी बेटी भी वापस चली गईं, घर पर रेशमा और उनका बेटा ही है। पूरे अपार्टमेंट में इस कदर सन्नाटा छाया हुआ था कि कोई भी अपनी बालकनी तक से बाहर नहीं आया। फिलहाल रेशमा की देखरेख के लिए दो महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
रिद्धी और सिद्धी ने जुड़वां होने के कारण हर पल को साथ जिया। दोनों एक रंग के कपड़े पहनतीं। खाने में दोनों को एक ही चीज पसंद आती थीं। रविवार सुबह जब दोनों का शव पुलिस लेकर निकली तो पड़ोसी भी रो पड़े। कहा भी कि दोनों एक साथ दुनियां में आईं और एक साथ जा भी रही हैं। मां रेशमा बेटियों का शव देखकर फफक पड़ीं और बहोश होकर गिर पड़ीं। होश आने पर बार-बार बेटियों का नाम लेकर पुकारतीं।
रोते-रोते कई बार रेशमा बेसुध हुईं। होश आने पर कई बार पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़कर कहा कि आरोपी पति को फांसी होनी चाहिए तभी हमारी बेटियों को इंसाफ मिलेगा और मेरे कलेजे को ठंडक मिलेगी।
शशि रंजन के झगड़ालू स्वभाव के कारण पंचनामा में हस्ताक्षर करने के लिए पांच लोग नहीं मिले। इस पर उसके काम करने वाली नौकरानी अमरावती उर्फ आशा, उसके पिता को बुलाया गया।
देर शाम दोनों बेटियों का तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। गला रेते जाने के कारण ज्यादा खून बहा, जिसकारण मौत हुई है। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने बताया कि दोनों की श्वास नली पूरी तरह से कटी हुई है। गर्दन में करीब तीन से चार इंच गहरा घाव था। गर्दन इस कदर रेती गई कि कोई भी बचने की संभावना नहीं थी। दोनों को खाने में कोई नींद की गोली या नशीला पदार्थ दिया गया है, ये जानने के लिए दोनों का बिसरा यानी आंत में मिले भोजन के सैंपल लिए गए हैं।
रेशमा ने बताया कि वह कानपुर के एक मेंस पार्लर में काम करती थीं, जहां उनकी मुलाकात शशि रंजन से हुई। साल 2014 में प्रेम विवाह किया। शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन कुछ समय बाद उनके पति शराब के नशे में रोज मारपीट करने लगे। वे नींद की गोलियां भी लेते थे।
रेशमा ने बताया कि पति शक करता था, इसलिए घर के एंट्री गेट से लेकर किचन और बेडरूम तक हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए थे। उन्हें अपने ही कमरे में जाने नहीं दिया जाता था, जबकि दोनों बेटियों को पति अपने साथ रखते थे। वह अक्सर कहते थे कि तुम बेटे को लेकर कहीं भी चली जाओ, मैं बेटियों की परवरिश कर लूंगा। जब पति घर से बाहर जाते थे, तभी मैं बेटे के साथ उनके कमरे में जा पाती थी।






