
संवाददाता
कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना के अंतर्गत ग्राम जसापुर, विकासखंड झींझक में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया।
इस शिविर का शुभारंभ राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना के अंतर्गत निदेशक प्रसार डॉ. वी के त्रिपाठी के मार्गदर्शन में किया गया। जिसमें उन्होंने कृषकों को प्राकृतिक खेती के उद्देश्य को बताते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती एक रसायन मुक्त पशु आधारित और टिकाऊ कृषि पद्धति है, जो मिट्टी की उर्वरा शक्ति एवं गुणवत्ता को बढ़ाता है एवं फसल वृद्धि और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए कृषि में प्राकृतिक तरीकों का उपयोग करके की जाती है।
इस प्रशिक्षण में डॉ. त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि किसान प्राकृतिक खेती की तकनीकी को सीखे और इसे अपने क्षेत्र में लागू करने के लिए और ज्यादा से ज्यादा किसानों को प्रेरित करे। जिससे भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ्य भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। परियोजना संचालक डॉ. उमानाथ त्रिपाठी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वे प्राकृतिक आंदोलन में किसानों को शामिल होने के लिए प्रेरित करें। जिससे उत्पादन लागत कम करके किसानों की आय में बढ़ोतरी करके पर्यावरण का संरक्षण हो सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को गौ आधारित खेती भी कहते हैं इसमें एक गाय से 30 एकड़ तक की खेती की जा सकती है। क्योंकि एक एकड़ की खेती के लिए गाय के 1 दिन के गोबर की ही आवश्यकता होती है।
मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए फल सब्जियां और फलों जैसी बागवानी फसलों का उत्पादन पर्यावरण अनुकूल तरीके से करना होगा इसमें मल्चिंग हरी खाद और मिश्रित खेती को अपना कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सकता है।
डॉ. खान ने बताया कि देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से बने जीवामृत, बीजामृत जैसे उत्पादों का प्रयोग मिट्टी में सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा देने के लिए उपयोगी है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में शोध छात्र अमित कुमार एवं अमर बाबू का विशेष सहयोग रहा।
प्राकृतिक खेती मॉडल फॉर्म की संचालक निर्मला यादव एवं फूल सिंह यादव ने भी अपने विचार साझा किये।
इस अवसर पर प्रगतिशील कृषक बाबूलाल निषाद सहित जनपद के विभिन्न विकास खंडों के किसान उपस्थित रहे।






