March 12, 2026

संवाददाता

कानपुर। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी पाँच दिनों में मध्यम से घने बादल छाए रहने के कारण, दिनांक 23 से 27 जुलाई, 2025 के मध्य स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। अधिकतम तापमान 34.0-36.0°C के मध्य रहेगा, जो सामान्य के आसपास रहने की संभावना है तथा न्यूनतम तापमान 28.0-29.0°C के मध्य रहेगा, जो सामान्य के आसपास रहने की संभावना है। सापेक्षिक आर्द्रता की अधिकतम एवं न्यूनतम सीमा 78-88% तथा 53-67% के मध्य रहेगी। हवा की दिशा पूर्व, उत्तर-पश्चिम रहेगी तथा गति 2.0-14.0 किमी प्रति घंटा रहेगी, तथा सामान्य से 3-4 किमी प्रति घंटा अधिक गति से हवा के झोंके आने की संभावना है।

भारतीय मौसम विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 23-27 जुलाई, 2025 के मध्य स्थानीय स्तर पर तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी है ।

आगामी सप्ताह में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना को देखते हुए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे धान की तैयार पौध की रोपाई शीघ्र पूरा करने का प्रयास करें। धान की फसल को छोड़कर शेष फसलों में सिचाई का कार्य न करें। खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य वर्षा न होने की दशा में करें। वर्षा ऋतु में पशुओं को खुले स्थान पर न बांधे और न ही उन्हें चरने के लिए बाहर छोड़ें।

धान की तैयार पौध की रोपाई शीघ्र पूरा करें तथा बर्षा न होने की दशा में मूँगफली, ज्वार, तिल एवं अरहर आदि की बुवाई का कार्य करें। धान के खेतों की मेड़ो को मजबूत बनायें। जिससे बरसात का पानी खेतों में रुका रहे । पशुओ को बरसात के रुके हुए पानी को न पीने दे। कीटनाशकों, रोगनाशी और खरपतवारनाशी रसायनों के लिए, केवल साफ पानी से उपकरणों को धोने के लिए उपयोग करें और हवा की विपरीत दिशा में खड़े होकर कीटनाशी, रोगनाशी और खरपतवारनाशी स्प्रे न करें। यदि संभव हो तो, छिड़काव करने के बाद, खाने से पहले और कपड़े धोने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धोना चाहिए।

किसानो को सूचित किया जाता है कि धान की तैयार पौध की रोपाई शीघ्र पूरा करें तथा बर्षा न होने की दशा में मूँगफली, ज्वार, तिल, उर्द एवं अरहर आदि की बुवाई उचित नमी पर ही करें।

फ़सल फ़सल विशिष्ट सलाह धान की तैयार पौध की रोपाई शीघ्र पूरा करें धान के पौध की रोपाई के लिए खेतों के मेड़ो को मजबूत करें। जिससे बरसात का पानी खेतों में रुका रहे । धान की फसल में चौड़ी एवं संकरी पत्ती के खरपतवार के नियंत्रण के लिए रोपाई के २-३ दिन के अन्दर अनिलोफॉस 30% ई.सी. या प्रिटलाक्लोर 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर की चावल दर से 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर 2-3 इंच पानी छिड़काव करें। धान की रोपाई के 15 – 20 दिन बाद बिसपायरीबैक सोडियम 10 एससी 0.20 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर उचित नमी की स्थिति में करें। धान में खैरा रोग दिखाई दे रहे हो तो इसके नियंत्रण हेतु 20-25 किलोग्राम जिंक सल्फेट व 2.5 किलोग्राम चूना 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। बर्षा न होने की दशा में निराई-गुड़ाई कार्य करें तथा अत्याधिक बर्षा जल निकास का उचित प्रबन्ध करें। मक्के की फसल में निराई-गुड़ाई करने के पश्यात यूरिया की टॉप ड्रेसिंग आसमान साफ होने पर करें। मक्का मक्के की फसल में तना छेदक एवं पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप दिखाई देने की संभावना है अतः इसके रोकथाम हेतु इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एस जी 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा डाइमेथोएट 30% ईसी 1.0 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव साफ मौसम पर करें। | अत्यधिक बर्षा जल निकास का उचित प्रबन्ध करें तथा बुवाई का कार्य स्थगित रखें। 

तिल के फसल की तिल संस्तुति किस्मों- टाइप-4, 12, 13, टाइप – 78, शेखर, प्रगति, तरुण, आर टी – 351 और आर टी -346 आदि में से किसी एक किस्म की बुवाई का कार्य आसमान साफ होने पर करें। | अत्यधिक बर्षा जल निकास का उचित प्रबन्ध करें तथा बुवाई का कार्य स्थगित रखें। खरीफ मूँगफली की मूँगफ संस्तुति संकर किस्म – चित्रा, कौशल, प्रकाश, अम्बर, उत्तकर्ष, दिव्या, कौशल- गुच्छेदार किस्म – चंद्रा, टा ली -28, 64 एम-13 आदि की बुवाई करें और मूंगफली की बुवाई के लिए 70-80 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई का कार्य आसमान साफ होने पर करें।

अत्यधिक बर्षा जल निकास का उचित प्रबन्ध करें तथा बुवाई का कार्य स्थगित रखें। खरीफ में बोई जाने काला वाली उर्द की संस्तुति जातियां- नरेन्द्र उर्द -1, आजाद उर्द -2, आजाद उर्द-3, शेखर – 1, शेखर-2, शेखर-3 , पन्त यू-30 आदि में से किसी एक प्रजाति की बुवाई के लिए 12-15 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टयर की दर से खाद एवं बीज की व्यवस्था कर बुवाई का कार्य बर्षा न होने की दशा में करें। चना

गन्ना खेत से अधिक बर्षा जल निकास का उचित प्रबंधन करें। गन्ने के जिन खेतों में पौधे निकल आए हों उनमें मिट्टी चढ़ा दें। सफेद लट के नियंत्रण के लिए लाइट ट्रैप या पौधों पर कीटनाशी छिड़काव कर नियंत्रण करें। शरद कालीन गन्ने को गिरने से बचाने के लिए बंधाई अवश्य करें। खड़ी गन्ने की फसल में खरपतवार

फ़सल नियंत्रण हेतु निराई-गुड़ाई का कार्य करें। चोटी बेधक कीट के नियंत्रण हेतु क्लोरेन्ट्रोनिलीप्रोल 18.5 एस.सी. के 150-200 मि.ली. कीटनाशक दवा को 400-500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करे।

खरीफ में रोपी जाने वाली सब्जियों जैसे- बैगन, मिर्च, टमाटर और अगेती फूलगोभी आदि फसलों की नर्सरी डाले, साथ ही बैगन, मिर्च की तैयार पौध की रोपाई करें। यदि खेत में पानी रुकने की संभावना है तो अगेती फूलगोभी, बैगन, टमाटर, मिर्च आदि की रोपाई मेड़ों पर करें। 

फलदार बागों की रोपाई हेतु मई माह में खोदे गये गढ्ढों की भराई करने के लिए ऊपर की आधी मिट्टी में सड़ी हुई खाद की गोबर को मिलाकर जमीन की सतह से 15 से 20 सेन्टीमीटर ऊपर तक भराई कर लें। अमरूद फलों में फलमक्खी से बचाव हेतु मिथाइल यूजिनाल एवं क्यू ल्योर ट्रैप 8-10 ट्रैप प्रति हेक्टेयर में 6 से 8 फिट की ऊंचाई पर टहनियों में बांध कर लटकाए तथा नीम एक्सट्रैक्ट 5 प्रतिशत प्रति लीटर पानी में घोलकर 10-15 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करें तथा 20-25 दिन के अन्तराल पर क्यू ल्योर बदलते रहे । 

भैंस पशुपालन में विशिष्ट सलाह किसानों को सलाह दी जाती है कि वे पशुबाड़े में बाह्य परजीवी की रोकथाम हेतु चूने का छिड़काव करें। पशुओं को बर्षा के दौरान खुले स्थान, पेड़ के नीचे न बांधे। पशुओं को रात के समय आसमान साफ होने पर ही खुले में बांधें। पशुओं को दिन के समय छायेदार स्थान पर बांधे। पशुओ को खुरपका-मुँहपका रोग की रोकथाम हेतु एफ. एम. डी. वैक्सीन तथा लगड़िया बुखार से बचाव हेतु वी. क्यू. वैक्सीन से टीकाकरण कराये। पशुओं को हरे और सूखे चारे के साथ पर्याप्त मात्रा में अनाज दें। पशुओ को साफ एवं ताजा पानी दिन में 3-4 बार अवश्य पिलायें। गर्भित पशुओ को ढलान वाले स्थान पर न बांधे । पशुओ को पेट में कीड़ो की रोकथाम के लिए कृमिनाशक दवा देने का उचित समय है।

मुर्गी पालक किसानों को सलाह दी जाती है कि वे मुर्गियों को भोजन में पूरक आहार, विटामिन और ऊर्जा खाद्य सामग्री मिलाएं और साथ ही साथ कैल्शियम सामग्री भी मुर्गियों को दें। मुर्गियों के बाड़े को साफ और रखें सूखा ताकि वे बीमारियों से बची रहें। मुर्गियों के स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच करें और बीमार मुर्गियों को झुंड से अलग करें। मुर्गियों को कीटों से बचाने के लिए, उनके बाड़े में कीटनाशक का उपयोग करें।

भारतीय मौसम विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 23-27 जुलाई, 2025 के मध्य स्थानीय स्तर पर तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी है।

आगामी सप्ताह में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना को देखते हुए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे धान की तैयार पौध की रोपाई शीघ्र पूरा करने का प्रयास करें। धान की फसल को छोड़कर शेष फसलों में सिचाई का कार्य

न करें। खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य वर्षा न होने की दशा में करें। वर्षा ऋतु में पशुओं को खुले स्थान पर न बांधे और न ही उन्हें चरने के लिए बाहर छोड़ें।