February 28, 2026

संवाददाता 

कानपुर।  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 12 दिनों में दो बार कानपुर का दौरा किया। समाजवादी पार्टी ने उनके दौरे के साथ ही अपना नया चुनावी गाना भी लॉन्च कर दिया। इसे राजनीतिक  जानकार इसे विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत बता रहे हैं।
अखिलेश यादव का दौरा औपचारिक कम, सियासी संदेशों से ज्यादा भरा नजर आया। अखिलेश ने फेमस ‘मुन्ना समोसा’ की दुकान पर समोसा का स्वाद चखा। उनके साथ बेटी अदिति यादव, सीसामऊ से विधायक नसीम सोलंकी, पूर्व विधायक इरफान सोलंकी और विधायक अमिताभ बाजपेयी मौजूद रहे।
इन्होंने यह संकेत दिया कि पार्टी इमोशनल कनेक्ट और संगठनात्मक एकजुटता दोनों पर काम कर रही है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लोकसभा चुनाव में मिले उत्साह को सपा अब विधानसभा तक विस्तार देना चाहती है। कानपुर को ‘चुनावी लॉन्चिंग पैड’ बनाना उसी रणनीति का हिस्सा है।
एक तरफ उन्होंने जहां समोसे की दुकान से सत्तापक्ष पर तंज कसा, तो वहीं दूसरी तरफ सपा के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से एक नया चुनावी कैंपेन सॉन्ग लॉन्च कर दिया। इस वीडियो में अखिलेश यादव के साथ समर्थकों का भारी हुजूम और कार्यकर्ताओं का जोश दिख रहा है।
सपा अब लोकसभा चुनाव की सफलता को विधानसभा चुनाव तक खींच कर ले जाना चाहती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अखिलेश ने कानपुर को अपना ‘ चुनावी लॉन्चिंग पैड’ बनाकर यह संदेश दिया है कि वे अब रुकने वाले नहीं हैं।
सपा की ओर से जारी किए गए नए चुनावी गीत में पीडीए  (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के मुद्दे को प्रमुखता से पिरोया गया है। गाने के बोल ‘साइकिल चलेगी यूपी में, फिर से अखिलेश चाहिए’ सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन का आह्वान कर रहे हैं।
इस गाने के जरिए सपा ने न केवल युवाओं को साधने की कोशिश की है, बल्कि विकास के पुराने दावों को भी नए सिरे से पेश किया है। यह नैरेटिव बताता है,कि पार्टी अब डिजिटल वॉर में भाजपा को उसी की भाषा में जवाब देने की तैयारी कर रही है।
समाजवादी पार्टी का यह आक्रामक रुख और सोशल मीडिया कैंपेन भाजपा के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है। जिस तरह से कानपुर में भीड़ उमड़ी और गानों के जरिए ‘शेर’ और ‘नौजवान’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर अखिलेश यादव की ब्रांडिंग की जा रही है, इस दौरे ने 2027 के विधानसभा चुनाव को अभी से दिलचस्प बना दिया है।
कानपुर की गलियों से शुरू हुआ ‘साइकिल’ का सफर आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में कितनी तेजी पकड़ेगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन अखिलेश के इस दांव ने सत्तापक्ष के खेमे में हलचल जरूर तेज कर दी है।