
संवाददाता
कानपुर। शहर के मकड़ीखेड़ा और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। सालों से बारिश के मौसम में बाढ़, कीचड़ और गंदगी का दंश झेल रहे इस क्षेत्र की तस्वीर अब बदलने वाली है।
कमिश्नर के. विजयेंद्र पांडियन की पहल पर प्रशासन ने एक ऐसी कार्ययोजना तैयार की है, जो न केवल पानी की निकासी करेगी बल्कि इस क्षेत्र को जलभराव से हमेशा के लिए आजाद कर देगी।
मकड़ीखेड़ा का इलाका भौगोलिक रूप से काफी नीचा है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘लो लाइंग एरिया’ कहा जाता है। उचित जल निकासी न होने के कारण मानसून के दौरान यहाँ का पानी गलियों में ही फंसकर रह जाता था। हालात इतने बदतर हो जाते थे कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी महीनों तक घरों के बाहर और अंदर सिल्ट व गंदगी जमा रहती थी। लोगों को साल के तीन से चार महीने भारी मुसीबतों के बीच गुजारने पड़ते थे। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए कमिश्नर ने जल निगम के माध्यम से एक बड़े प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार करवाई है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पहली बार लगभग 26.42 वर्ग किलोमीटर के कैचमेंट एरिया को कवर करने के लिए आरसीसी ड्रेन बनाने की तैयारी है। 200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाले इस ड्रेन की कुल लंबाई सात किलोमीटर होगी। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 15 से 20 अलग-अलग स्थानों पर जंक्शन बनाए जाएंगे। इन जंक्शनों के माध्यम से क्षेत्र के छोटे नालों को इस मुख्य ड्रेन से जोड़ा जाएगा, जिससे बारिश का पानी बिना रुके सीधे बाहर निकल सकेगा।
कमिश्नर के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का सर्वे पूरा हो चुका है और इसकी विस्तृत कार्ययोजना शासन को भेजी जा चुकी है। उम्मीद है, कि मार्च के महीने में शासन से इसे अंतिम हरी झंडी मिल जाएगी और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस ड्रेन के बन जाने से केवल मकड़ीखेड़ा ही नहीं, बल्कि गंगा बैराज के आसपास के 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाली लगभग 10 लाख की आबादी को सीधा लाभ पहुंचेगा।






