January 22, 2026

संवाददाता
कानपुर।
नगर के स्वास्थ्य मानचित्र पर एक बड़ा बदलाव आकार ले रहा है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एलएलआर अस्पताल में प्रस्तावित आठ मंजिला ओपीडी ब्लॉक केवल एक नई इमारत नहीं होगा, बल्कि यह रोजाना इलाज के लिए आने वाले हजारों मरीजों की भीड़, अव्यवस्था और लंबी प्रतीक्षा की समस्या का स्थायी समाधान बनने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
फिलहाल एलएलआर अस्पताल की ओपीडी में सुबह होते ही मरीजों की लंबी कतारें लग जाती हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और दूर-दराज से आए गंभीर रोगी एक ही परिसर में अलग-अलग विभागों के लिए भटकने को मजबूर होते हैं। कई बार इलाज से ज्यादा समय इंतजार में ही निकल जाता है। प्रस्तावित नया ओपीडी ब्लॉक इसी व्यवस्था को पूरी तरह बदलने का दावा करता है।
करीब 183.6 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह आठ मंजिला भवन आधुनिक अस्पताल प्रबंधन की मिसाल होगा। मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल की तर्ज पर तैयार किया जा रहा यह ब्लॉक “वन फ्लोर–वन स्पेशियलिटी” मॉडल पर आधारित होगा। इसका मतलब यह है कि मरीज को सीधे उसी मंजिल पर पहुंचना होगा, जहां उसके इलाज से जुड़ा विभाग मौजूद होगा। आर्थोपेडिक, नेत्र रोग, त्वचा, सर्जरी, मेडिसिन समेत अन्य प्रमुख विभाग अलग-अलग मंजिलों पर व्यवस्थित किए जाएंगे।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ मरीजों को मिलने वाला समय होगा। एक ही विभाग में एक साथ कई चिकित्सकों के बैठने की सुविधा रहेगी, जिससे प्राथमिकता के आधार पर मरीजों को तेजी से देखा जा सकेगा। इसका सीधा असर इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की संतुष्टि पर पड़ेगा। वहीं मरीजों की भीड़ बंटने से डॉक्टरों पर काम का दबाव भी कम होगा।
नया ओपीडी ब्लॉक केवल सामान्य इलाज तक सीमित नहीं रहेगा। जीटी रोड साइट पर मौजूद सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक और प्रस्तावित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के साथ मिलकर यह पूरा परिसर कानपुर को एक मजबूत मेडिकल हब के रूप में स्थापित कर सकता है। सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों और जटिल सर्जरी के मामलों में मरीजों को अब लखनऊ या दिल्ली रेफर करने की मजबूरी भी कम होगी।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला के अनुसार, मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कदम जरूरी हो गया था। उन्होंने बताया कि शासन को भेजा गया प्रस्ताव सिर्फ भवन निर्माण से जुड़ा नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती है, तो एलएलआर अस्पताल की पहचान केवल एक सरकारी अस्पताल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह एक सुव्यवस्थित, आधुनिक और मरीज-केंद्रित चिकित्सा संस्थान के रूप में उभरेगा, जहां इलाज के साथ मरीज के समय और सम्मान दोनों की कद्र होगी। 

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