March 3, 2026

संवाददाता

कानपुर।  11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मे सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.आनंद कुमार सिंह नें की। कुलपति ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि यौगिक जीवन शैली का प्रमुख अंग शारीरिक स्वास्थ्य है, जिसके लिए सतत प्रयास करने की जरूरत है। संतुलित एवं व्यवस्थित जीवन के लिए शरीर पर समुचित एवं केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है, आसन एवं प्राणायाम इसमें सहायक होते हैं। उन्होंने योग को बड़ी ताकतवर प्रक्रिया बताया तथा कहा कि योग के चमत्कारिक परिणाम मिलते हैं।

उन्होंने कहा कि योग मूलतः भारत की पद्धति है, जिसको वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा है जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमिट योगदान है। उन्होंने बताया कि आजकल योग पर आधारित लोकप्रिय पाठ्यक्रम भी तैयार हो रहे हैं।जिनको अपनाकर जीवन की भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति की जा सकती है। योगाचार्य डॉ. अनिल आनंदम ने अर्ध चंद्रासन, गोमुख आसन व भुजंग आसन, सूर्य नमस्कार के विषय में विस्तार से बताया। 

इस अवसर पर वरिष्ठ योग मेडिटेशन प्रशिक्षक सुष्मिता तिवारी, योगाचार्य राजेश वर्मा,योगाचार्य सुनीता शाक्य एवं योग वालिंटियर रतन यादव ने भी योग के लाभ एवं उसके बारे में जानकारी दी। 

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर  देश के प्रधानमंत्री, प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल  के संबोधन का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया। 

इस मौके पर  अधिष्ठाता गृह विज्ञान डॉ.सीमा सोनकर द्वारा लिखित योग पुस्तक का विमोचन भी किया गया।कार्यक्रम के आयोजक अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. मुनीश कुमार द्वारा अपने स्वागत संबोधन में कहा गया कि योग निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है इसलिए छात्र छात्राओं को दृढ़ संकल्प के साथ लक्ष्य निर्धारित करते हुए योग को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की आवश्यकता है। 

निदेशक प्रसार डॉ. आरके यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित समस्त कृषि विज्ञान केंद्रों पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस धूमधाम से मनाया गया।कार्यक्रम में अधिष्ठाता कृषि डॉ. सी एल मौर्य, प्रो. डॉ. पी के सिंह, निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र डॉ. विजय यादव, प्रभारी सब्जी विभाग डॉ. केशव आर्या,अधिष्ठाता वानिकी डॉ. कौशल कुमार, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. वी.के.त्रिपाठी आदि शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों द्वारा भी विचार व्यक्त किए गए। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों, संभ्रांत नागरिकों के साथ-साथ लगभग 1400 छात्र-छात्राओं द्वारा प्रतिभाग किया गया।