
संवाददाता
कानपुर। 11वीं के एक छात्र ने ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जो प्रदूषण कम करने के साथ ही लोगों में होने वाली बीमारियों को भी घटाने में मदद कर सकता है। विज्ञान वर्ग के छात्र श्रेयांश वर्मा ने यह “पॉल्यूशन सॉल्यूशन प्रोजेक्ट” बनाया है।
इस प्रोजेक्ट में हवा में मौजूद धुएं के साथ मिश्रित कार्बन डाई आक्साइड को फिल्टर करके एसीटोन केमिकल मिलाकर उसे स्याही में बदलने की तकनीक विकसित की गई है। श्रेयांश का दावा है कि यह तरीका न केवल वायु प्रदूषण को कम करेगा, बल्कि उद्योगों में उपयोग होने वाली स्याही का एक सस्ता और पर्यावरण अनुकूल विकल्प भी बनेगा।
स्कूल ने श्रेयांश को इस प्रोजेक्ट के लिए पुरस्कार देने की घोषणा की है। इसके साथ ही दिसंबर में होने वाली आईआईटी की प्रदर्शनी में इस प्रोजेक्ट को प्रस्तुति के लिए भेजने की तैयारी भी की जा रही है।
श्रेयांश ने बताया कि सड़क पर चलने वाली गाड़ियों से निकलनी वाले कार्बन मोनोआक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है। इसी को देखते हुए यह प्रोजेक्ट तैयार किया हूं। यह पॉल्यूशन सॉल्यूशन प्रोजेक्ट धुएं में मौजूद कार्बन डाई आक्साइड को अवशोषित करके फिल्टर में इकट्ठा करता है और बाद में उसे इंक में बदल देता है।
इस डिवाइस में एक सेंसर भी लगाया गया है। जैसे ही इसके पास से प्रदूषित धुआं गुजरता है, तो सेंसर तुरंत एक्टिव हो जाता है। ऐसे में यह धुएं को खींचकर फिल्टर तक पहुंचाता है। फिल्टर में मौजूद कार्बन कलेक्टर धुएं से कार्बन को अलग कर जमा करता रहता है। यह कार्बन सूखे रूप में एकत्र होता जाता है।
इसके बाद इस सूखे कार्बन में एसीटोन केमिकल मिलाया जाता है, तो वह स्याही में बदल जाता है। एसीटोन एक सॉल्यूशन केमिकल है, जिसका उपयोग कार्बन को इंक में बदलने के लिए किया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कार्बन डाई आक्साइड को तोड़ना आसान नहीं होता, इसलिए इस डिवाइस में एक कैटलिस्ट लगाया गया है, जो प्रक्रिया को तेज़ और प्रभावी बनाता है।
श्रेयांश का कहना है कि जिस तरह से प्रदूषण फैल रहा है, इस प्रोजेक्ट के माध्यम से ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण से बचाव किया जा सकता है। इससे अस्थमा जैसी बीमारियों में भी कमी आ सकती है।
श्रेयांश ने बताया कि जिस तरह से प्रदूषण फैल रहा है। ऐसे में यह ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण से बचने का एक अच्छा विकल्प बन सकता है। इससे अस्थमा जैसी बीमारियों में भी कमी आ सकती है। आमतौर पर शहरों में वाहनों के चलने और कामकाज के दौरान कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसें निकलती हैं, जो वातावरण में अधिक प्रदूषण फैलाती हैं।
इस प्रोजेक्ट में लगे सेंसर इन गैसों को तुरंत ऑब्ज़र्व करेंगे और पूरे प्रदूषण को अपने भीतर समावेशित कर लेंगे। इसका प्रयोग ऐसे स्थानों पर किया जा सकता है, जहां वाहनों का अधिक रुकना और चलना होता है, जैसे चौराहों पर छोटे संयंत्र लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा फैक्ट्री क्षेत्रों, जहां विभिन्न प्रकार की गैसों का धुआं निकलता है, इन क्षेत्रों में यह तकनीक और अधिक कारगर साबित हो सकती है।
श्रेयांश बीएनएसडी शिक्षा निकेतन, बेनाझाबर के छात्र हैं। कुछ दिन पहले ही स्कूल में एक बड़ी प्रदर्शनी आयोजित की गई थी, जिसमें उन्होंने अपने प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन दिया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने इस प्रोजेक्ट के लिए 15,000 रुपए पुरस्कार देने की घोषणा की।
श्रेयांश ने बताया कि नवंबर महीने में ही एचबीटीयू में प्रदर्शनी होनी है। उसमें भी प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन देने के लिए भेजा जाएगा। उसके बाद दिसंबर महीने में आईआईटी कानपुर में भी प्रदर्शनी के दौरान प्रोजेक्ट को प्रेजेंटेशन के लिए भेजा जाएगा।






