
संवाददाता
कानपुर। मेट्रो के पहले कॉरिडोर आईआईटी से नौबस्ता के पूरे होने का सपना अब पूरा होने के बेहद करीब है। पिछले शनिवार की रात जब शहर सो रहा था, तब यूपी मेट्रो के इंजीनियरों ने सेंट्रल स्टेशन से नौबस्ता के बीच 8 किमी लंबे नए ट्रैक पर मेट्रो को 80 किमी प्रति घंटे की हाई-स्पीड से दौड़ाकर ट्रायल पूरा किया।
सबसे खास बात यह है कि जून के आखिरी हफ्ते तक इस रूट पर यात्री सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद आप सेंट्रल से नौबस्ता की दूरी महज 13 मिनट में तय कर सकेंगे, जिसमें अभी सड़क मार्ग से 40 से 50 मिनट का समय लगता है।
यह ट्रायल रन शनिवार रात ठीक 1 बजे शुरू हुआ। पहले ट्रेन को 20-30 किमी/घंटा की औसत गति पर चलाकर पटरी की मजबूती जांची गई, फिर अचानक इसे 80 किमी/घंटा की टॉप स्पीड पर दौड़ाया गया। रात के सन्नाटे में मेट्रो ने सेंट्रल से नौबस्ता के बीच 8 किमी का सफर मिनटों में तय किया।
अभी तक सेंट्रल से नौबस्ता तक जाने के लिए झकरकटी, टाटमिल और किदवई नगर जैसे भारी ट्रैफिक वाले इलाकों से होकर गुजरना पड़ता है, जिसमें 50 मिनट तक लग जाते हैं। मेट्रो शुरू होने के बाद यह दूरी आप मात्र 13 मिनट में तय कर सकेंगे।
यह पूरी मेट्रो कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रैन कंट्रोल तकनीक पर आधारित है, जिसे फ्रांस की कंपनी एल्स्टॉम ने बनाया है। ट्रायल के दौरान सबसे खास जांच यह थी कि जब ट्रेन जमीन के अंदर से एलिवेटेड ट्रैक पर आती है, तो उसकी स्पीड और दरवाजों के सेंसर कैसे काम करते हैं।
इतने लंबे कॉरिडोर आईआईटी से नौबस्ता तक लगभग 24 किमी का किराया भी शहरवासियों की जेब के हिसाब से रखा गया है। आप पूरी दूरी का सफर मात्र 60 रुपए में कर सकेंगे, जो ऑटो या कैब के मुकाबले काफी सस्ता और आरामदायक होगा।
ट्रायल सफल होने के बाद अब अंतिम पड़ाव ‘सुरक्षा निरीक्षण’ है। 30 मई तक मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त की टीम इस ट्रैक का बारीकी से मुआयना करेगी। उनकी क्लीयरेंस मिलते ही जून के आखिरी हफ्ते में यह रूट आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
यूपीएमआरसी के संयुक्त महाप्रबंधक जनसंपर्क पंचानन मिश्रा ने बताया कि ट्रायल रन की शुरुआत शनिवार रात 1 बजे की गई। पहले सेंट्रल स्टेशन से मेट्रो को 20 से 30 किमी प्रति घंटे की धीमी रफ्तार पर चलाया गया। जब ट्रैक और सिग्नलिंग का फीडबैक सही मिला, तो इसे 80 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार पर दौड़ाया गया। यह टेस्ट अप और डाउन, दोनों लाइनों पर किया गया ताकि सुरक्षा की हर बारीकी को परखा जा सके।
कानपुर की यह मेट्रो पूरी तरह ऑटोमैटिक है और ‘ड्राइवरलेस’ तकनीक पर आधारित है। इसे फ्रांस की कंपनी ‘एल्स्टॉम’ ने डिजाइन किया है। ट्रायल के दौरान करीब 100 छोटे-बड़े टेस्ट किए गए, जिनमें ब्रेक टेस्ट और मैप वेरिफिकेशन सबसे अहम थे। इसमें यह जांचा गया कि अंडरग्राउंड से एलिवेटेड ट्रैक पर आते समय ट्रेन की स्पीड और दरवाजों के खुलने-बंद होने का समय बिल्कुल सटीक रहे।
सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसके लिए एक विदेशी एजेंसी इंडिपेंडेंट सेफ्टी असेसर को भी तैनात किया गया था। इस एजेंसी ने दो ट्रेनों के बीच की दूरी और सिग्नलिंग उपकरणों की बारीकी से जांच की है।
अब 30 मई तक मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त की टीम निरीक्षण के लिए आ सकती है। उनकी हरी झंडी मिलते ही जून अंत तक इस रूट पर कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा।
पूरा कॉरिडोर शुरू होने के बाद आईआईटी कानपुर से नौबस्ता तक की 24 किलोमीटर की दूरी करीब 35 से 40 मिनट में तय की जा सकेगी।
वर्तमान में 16 किमी आईआईटी से सेंट्रल तक मेट्रो पहले से ही चल रही है। बाकी बचे 8 किमी के हिस्से पर ट्रायल सफल होने के बाद अब कानपुर मेट्रो का पहला फेज पूरी तरह से पटरी पर दौड़ने को तैयार है।






