March 12, 2026

संवाददाता
कानपुर।
  बाराबंकी स्थित श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में एबीवीपी ने कानपुर में मशाल जुलूस निकाला। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से शुरू हुआ जुलूस रामा तिराहे तक गया और फिर विश्वविद्यालय के पास लौट आया।
एसआरएमयू में छात्रों से अवैध वसूली और बार काउंसिल से मान्यता न होने के बावजूद विधि पाठ्यक्रमों में प्रवेश जैसे मुद्दों पर छात्र आंदोलन कर रहे थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस और बाहरी तत्वों की मदद से आंदोलन को दबाने का प्रयास किया। इस दौरान कई छात्र घायल हुए।
नगर में निकाले गए जुलूस में शामिल छात्र-छात्राएं और कार्यकर्ता मशालें और तख्तियां लेकर चल रहे थे। वे न्याय दो-न्याय दो और एबीवीपी डायनामाइट, शिक्षा के दलालों को खत्म करो जैसे नारे लगा रहे थे। एबीवीपी पदाधिकारियों ने लोकतांत्रिक तरीके से मांग उठाने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज की निंदा की।
कार्यक्रम में आशुतोष, प्रभात, खुशी, दिनेश यादव, एल्विन, उज्ज्वल समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी ने एसआरएमयू में फैले भ्रष्टाचार और विद्यार्थियों से अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाई।
छात्रों ने मांग रखी कि लाठीचार्ज घटना में पुलिसकर्मियों और बाहरी गुंडों सहित सभी दोषियों पर मुकदमा दर्ज कर कठोरतम कार्यवाही सुनिश्चित हो। किसके आदेश पर लाठीचार्ज किया गया, यह प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं जिनका उत्तर अतिशीघ्र सार्वजनिक किया जाए।
विधि छात्रों के वर्तमान को भ्रम में रखकर भविष्य के साथ खिलवाड़ कर नवीनीकरण व अनुमति के बिना विधि पाठ्यक्रम के अवैध संचालन की समग्रता से तथ्यात्मक जांच की जाए व पूरी प्रक्रिया में जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को दंडित कर विश्वविद्यालय को बंद किया जाए। विलम्ब शुल्क के नाम पर अर्थदण्ड के रूप में बड़ी धनराशि की उगाही, सामाजिक कल्याण के नाम पर लिए जाने वाले शुल्क, निर्धारित मानक आदि की भी सघनता से जांच कर रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। छात्र आंदोलन के लिए संघर्षरत दो छात्रों को बिना किसी चेतावनी के सीधे निष्कासित कर देने की प्रक्रिया भी अवैधानिक है, इस संबंध में दोषियों को दण्डित कर विद्यार्थियों को न्याय दिलाया जाए।
उच्च शिक्षा परिषद के सचिव द्वारा दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट के आधार पर रामस्वरूप विश्वविद्यालय पर कार्यवाही आरम्भ की जाए।
श्री रामस्वरूप विश्वविद्यालय ने लगभग 6 बीघे सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया था। राजस्व जांच के बाद मामला तहसीलदार कोर्ट पहुँचा, जिसने 25 अगस्त 2025 को विश्वविद्यालय प्रबंधन पर 27.96 लाख जुर्माना लगाते हुए कब्जा हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने 15 दिन में जुर्माना अदा कर स्वयं अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया है। अवैध निर्माण पर कार्यवाही की जाए।